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How to Convert Dreams To Real? अपने सपनों को वास्तविक में बदलें?

“कल्पना सच्चा जादुई गालीचा है” |
             - नॉर्मन विन्सेन्ट पील 
                              (लेखक )
  


मैंने ये एक बुक में पढ़ा था और जब से ये पढ़ा था तबसे अपने सपनो को वास्तव में जीने लगा हु।
हम जो सोचते है बिल्कूल ऊसी तरह से होता है।  ये  बात बिल्कुल सौ प्रतिशत सही  है।
कैसे देखो जरा अपने भूतकाल में जोर डालो और देखो की आज जो कुछ भी अपने पास है और जो कुछ भी हम हासिल कर पाए है क्या हमने इसतरह से कुछ देखा था फिर अपने दिमाग में एक विचार का जन्म हुआ था या हम उसके ऊपर भरोसा करने लगे।
जरा जोर डाल  के सोचना और देखना तब आप देखोगे की है ऐसा हमने कुछ सालो पे कही तो भी देखा था या कही सुना था और आज मै कुछ उसीतरह से जिंदगी भी जी रहा हु..

ये जो अपने साथ होता है उसके जिम्मेदार अपन खुद ही होते है फिर कैसा भी हो आपको जो भी हो रहा है अपनी सोच के कारण ही हो रहा
और ये जो सोच का जन्म कुछ देखने से या महसूस करने से ही होता है। लेकिन ये सब होना या ना होना ये अपने हाथ में है।
इस दुनिया में जो भी हुआ है या जो कुछ भी आगे नया कुछ होने वाला है उसकी शुरुवात सोच से ही होती है।
और वही पूरा सच्चा  और शुद्ध होता है. अपनी सोच जब आती तो पूरी तरह से सच्ची होती।

"कल्पना सच्चा जादुई गालीचा है"


अगर हम सच्ची में अपने सपनो को जीना चाहते है तो सबसे पहले अपनी सोच को पूरी तरह से सपनो से भर दीजिये।
इसक मतलब है की आप एक सपना देखिए कुछ भी जो आप को अच्छा लगे वो देखिये और जैसे सपना देख के पूरा हो जाये तो उसको हक्कीकत में बदल में के बारे में सोचो।
उदा- एक छोटा बच्चा बचपन में बोलता है की पायलट बनना है (ये सपना हो गया), बच्चो को पायलट बनाना है तो उसको ये सोचना हो गा की प्लेन को उडाते  कैसे है? प्लेन को उड़ाने के लिए क्या क्या लगता हैउसके उड़ाके क्या करते है और उसके उसे क्या होता है किसतरह से होता है? इत्यादि। ...
अगर ये सब के बारे में अगर सोच लिया और अपने सोच को पक्का बना लिया तो। सारे रस्ते आसान दिखने लगते  है।
जब ये सब पक्का हो गया तो अपने सोच में एक चमत्कारी शब्द का उपयोग करे।
जब आपने सपना देख लिया तो उसके बाद बोलिये धन्यवाद इस सपने को मुझे दिखाने के लिए.
उदा - बच्चे का सपना था पायलेट फिर उसके बाद धन्यवाद बोले मुझे पायलेट बनाने का सपना दिखाने के लिए।
उसके बाद कुछ अपने आप से सवाल पूछे की और फिर से धन्यवाद मुझे जवाब देने केलिए
उदा- प्लेन को उड़ने को क्या लगता है ? फिर धन्यवाद बोले मुझे ये सवाल का जवाब देने के लिए।

अगर इस तरह से आप जब अपनी सोच को बना लेते हो तो आप अपने आप में बदल देखने लग जाओगे।
और जब भी आप को अपने आप में बदल देखने चालू हो जायेगा तो फिर से बोलिये की धन्यवाद मुझे मेरे सपने के पास लेके जाने के लिए।

धन्यवाद धन्यवाद ध्न्यवाद। ..

ये जब भी आप अपने सपनो को बोलते हो और अपने आप को  किये हुए सवालो को बोलना चालू कर देतो हो तो आपका सपना आपके सामने कब आएगा आप को एकिन नही होगा।

जैसा बचपन में बच्चे बोलते है और बादमे भूल जाते है लेकिन उनकी सोच में कुछ कुछ रहता है तो उतना ही उनको मिलहि जाता है..

इसलिए अपने सपनो को वास्तविक में बदल ना चाहते हो तो,
सपने देखिये धन्यवाद बोलिये फिर सवाल पूछे और धन्यवाद बोलिये  और जो जवाब मिल जाये तो उसके ऊपर कार्य करे और धन्यवाद बोलिय शुरू करने से पहिले और और पूरा करने के बाद 
आप अपने सपने को जल्द ही पूरा कर पाएंगे। .

जितने भी लोग है जो आज हम देख पा रहे की वो लोग उनका सपना पूरा करके जी रहे है तो थोड़ा समय निकाल के उनको देखिये और सुनियो तब आपको पक्का हो जायेगा की धन्यवाद क्यू जरुरी है , और कृतध्नता किस तरह से काम करती है।
और मै भी आपको ये समजने के लिए धन्यवाद बोलता हु।